गर्मियों में अचानक चेहरे पर छोटे-छोटे दाने निकलना बहुत आम समस्या है। कई लोगों को माथे, नाक, पीठ और छाती पर बार-बार पसीने वाले मुंहासे होने लगते हैं। शुरुआत में यह मामूली लगते हैं, लेकिन लगातार ऑयल, पसीना और धूल जमा होने पर सूजन बढ़ सकती है। कई बार लोग इसे सामान्य पिंपल समझकर हार्श स्क्रब, मोटी क्रीम या गलत एक्ने जेल लगाना शुरू कर देते हैं। यहीं से त्वचा ज्यादा इरिटेट होने लगती है।
गर्मियों के मौसम में उमस (Humidity) और तेज धूप के कारण हमारी त्वचा की तेल ग्रंथियां (Sebaceous Glands) ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं। जब यह अत्यधिक तेल (Sebum), पसीने और हवा में मौजूद धूल-मिट्टी के साथ मिलता है, तो त्वचा के रोमछिद्र (Pores) बंद हो जाते हैं। इसके कारण ‘स्वेट एक्ने’ (Sweat Acne) तेजी से बढ़ने लगते हैं। अगर समय रहते इन्हें कंट्रोल न किया जाए, तो दाग, बार-बार ब्रेकआउट और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
कई मरीज यह नहीं समझ पाते कि हर गर्मियों वाला मुंहासा एक जैसा नहीं होता। कुछ बैक्टीरियल एक्ने होते हैं। कुछ फंगल इंफेक्शन होते हैं। कई मामलों में पसीने के कारण होने वाला मलेशिया फॉलिकुलिटिस (फंगल हेयर फॉलिकल इंफेक्शन) सामान्य पिंपल जैसा दिखता है। Since दोनों समस्याओं का इलाज अलग होता है, इसलिए सही पहचान बहुत जरूरी हो जाती है। Amritaya Clinics में डर्मेटोलॉजिस्ट पहले स्किन की ऑयल एक्टिविटी, दानों का पैटर्न और इंफ्लेमेशन देखकर समस्या की पहचान करते हैं। इसके बाद स्किन टाइप के अनुसार उपचार चुना जाता है।
ये रहे 3 मुख्य कारण चेहरे पर मुहांसे होने के –
पसीना और गाढ़ा सीबम मिलकर त्वचा पर चिपचिपी परत बना लेते हैं। इससे पोर्स ब्लॉक हो जाते हैं और त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती। जब यह गंदगी लंबे समय तक त्वचा पर बनी रहती है, तो छोटे दाने तेजी से बनने लगते हैं।
कई बार चेहरे, गर्दन और पीठ पर निकलने वाले छोटे खुजलीदार दाने फंगल इंफेक्शन होते हैं। यह पसीने वाले हिस्सों में तेजी से फैलते हैं। By the way, फंगल एक्ने पर सामान्य एक्ने क्रीम हमेशा काम नहीं करती। गलत दवा लगाने से त्वचा और खराब हो सकती है।
अगर गर्मियों में बार-बार एक जैसी समस्या हो रही है, तो इन संकेतों को नजरअंदाज न करें:
संकेत | क्या महसूस हो सकता है |
माथे और हेयरलाइन पर छोटे दाने | ज्यादा पसीने के बाद बढ़ना |
पीठ और छाती पर ब्रेकआउट | जिम या आउटडोर एक्टिविटी के बाद |
त्वचा में खुजली | फंगल एक्ने की संभावना |
चेहरे पर ज्यादा ऑयल | पोर्स ब्लॉक होना |
बार-बार लाल पिंपल | बैक्टीरियल इंफ्लेमेशन |
अगर यह समस्या हर साल गर्मियों में वापस आती है, तो सिर्फ फेसवॉश बदलना काफी नहीं होता।
अगर साधारण फेसवॉश और OTC क्रीम से फायदा नहीं मिल रहा, तो क्लिनिकल ट्रीटमेंट ज्यादा असरदार हो सकते हैं। क्योंकि यह सिर्फ ऊपरी सफाई नहीं करते, बल्कि पोर्स के अंदर जमा ऑयल और इंफ्लेमेशन को टारगेट करते हैं।
गर्मियों के एक्ने में केमिकल पील्स काफी लोकप्रिय उपचार माने जाते हैं। इसमें त्वचा पर मेडिकल-ग्रेड एसिड की नियंत्रित परत लगाई जाती है ताकि जमा तेल, डेड स्किन और ब्लॉकेज हटाए जा सकें।
सैलिसिलिक एसिड (ऑयल घोलने वाला BHA) त्वचा के अंदर जाकर जमा सीबम और पसीने को साफ करता है। Since यह पोर्स के भीतर तक पहुंच सकता है, इसलिए ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन में इसका उपयोग ज्यादा किया जाता है। यह लालिमा और सूजन कम करने में भी मदद करता है।
यह पील्स पोर्स को कम एक्टिव बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे भविष्य में तेल का उत्पादन नियंत्रित हो सकता है और बार-बार होने वाले ब्रेकआउट कम हो सकते हैं।
यह सामान्य पार्लर फेशियल नहीं है। यह मेडिकल-ग्रेड मशीन से किया जाने वाला स्किन ट्रीटमेंट है। इसमें त्वचा को रगड़ा नहीं जाता, इसलिए संवेदनशील त्वचा वाले लोग भी इसे आसानी से करवा सकते हैं।
इस प्रक्रिया में वैक्यूम सक्शन तकनीक के जरिए ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और पोर्स में फंसा तेल निकाला जाता है। इसके बाद त्वचा में सैलिसिलिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट सीरम डाले जाते हैं ताकि स्किन शांत हो सके और ऑयल कंट्रोल बेहतर हो।
HydraFacial में क्या होता है? | इसका उद्देश्य |
वैक्यूम सक्शन | पोर्स की सफाई |
ब्लैकहेड एक्सट्रैक्शन | जमा गंदगी हटाना |
सैलिसिलिक सीरम | ऑयल कंट्रोल |
एंटीऑक्सीडेंट इन्फ्यूजन | स्किन को शांत करना |
कुछ मरीजों में बार-बार इंफ्लेमेटरी एक्ने होते हैं। ऐसे मामलों में लाइट और लेजर आधारित उपचार मदद कर सकते हैं।
यह थेरेपी त्वचा के अंदर जाकर एक्ने पैदा करने वाले बैक्टीरिया को टारगेट करती है। इससे एक्टिव सूजन और लालिमा कम करने में मदद मिल सकती है।
इस उपचार में चेहरे पर लिक्विड कार्बन लगाया जाता है और फिर लेजर से उसे ट्रीट किया जाता है। यह तेल ग्रंथियों को शांत करने में मदद करता है। साथ ही हल्के दाग और टैन को कम दिखाने में भी सहायता मिल सकती है।
अगर एक्ने ज्यादा बढ़ चुके हैं, तो डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन दवाएं दे सकते हैं। हर मरीज की स्किन अलग होती है, इसलिए दवाओं का चयन भी अलग हो सकता है।
दवा | इसका उपयोग |
क्लिंडामाइसिन | बैक्टीरिया कंट्रोल |
बेंज़ोइल पेरोक्साइड | इंफ्लेमेटरी एक्ने कम करना |
एडैपेलीन | पोर्स खोलने में मदद |
कीटोकोनाज़ोल लोशन | फंगल एक्ने कंट्रोल |
बिना सही डायग्नोसिस के एक्टिव एक्ने क्रीम लगाने से स्किन पीलिंग, जलन और ज्यादा ब्रेकआउट हो सकते हैं। कोई भी दवा को बिना डॉक्टर के सलाह के न लें। ये आपके लिए हानिकारक हो सकता है।
क्लिनिक ट्रीटमेंट तभी लंबे समय तक फायदा देते हैं जब घर पर सही स्किनकेयर भी फॉलो किया जाए।
दिन में दो बार चेहरा साफ करें। खासकर बाहर से आने या वर्कआउट के बाद। 2% Salicylic Acid वाला फेसवॉश पोर्स को साफ रखने में मदद कर सकता है।
गर्मियों में भारी क्रीम-बेस्ड सनस्क्रीन पोर्स ब्लॉक कर सकते हैं। इसलिए जेल-बेस्ड या Non-Comedogenic (पोर्स ब्लॉक न करने वाला) सनस्क्रीन ज्यादा बेहतर माना जाता है।
पसीने को त्वचा पर लंबे समय तक सूखने न दें। जिम या आउटडोर एक्टिविटी के बाद 10 मिनट के भीतर चेहरा साफ करना बेहतर रहता है।
ऑयली स्किन को भी मॉइस्चर की जरूरत होती है। लेकिन गर्मियों में भारी क्रीम की जगह Hyaluronic Acid (त्वचा में नमी बनाए रखने वाला तत्व) या जेल-बेस्ड मॉइस्चराइज़र ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं।
क्या करें (DO’s) | क्या न करें (DON’Ts) |
साफ तौलिया या टिश्यू इस्तेमाल करें | मुंहासों को फोड़ें नहीं |
हफ्ते में 1-2 बार माइल्ड AHA/BHA टोनर लगाएं | भारी ऑयल-बेस्ड मेकअप से बचें |
पसीना आने पर त्वचा थपथपाकर सुखाएं | हार्श स्क्रब इस्तेमाल न करें |
कॉटन कपड़े पहनें | लंबे समय तक पसीना सूखने न दें |
अगर बार-बार दाने निकल रहे हैं, खुजली हो रही है, पीठ और छाती पर तेजी से फैल रहे हैं या दाग बनने लगे हैं, तो स्किन एक्सपर्ट से जांच करवाना जरूरी हो सकता है। कई मरीज सालों तक फंगल एक्ने को सामान्य पिंपल समझकर गलत क्रीम लगाते रहते हैं। इससे समस्या बार-बार लौटती रहती है।
Amritaya Clinics में स्किन टाइप, ऑयल एक्टिविटी और एक्ने पैटर्न देखकर उपचार प्लान तैयार किया जाता है। Because हर ऑयली स्किन को एक जैसी दवा या एक जैसा ट्रीटमेंट जरूरी नहीं होता।
अगर आपको हर गर्मियों में छोटे-छोटे पसीने वाले दाने निकलते हैं, तो सिर्फ इंटरनेट टिप्स पर निर्भर न रहें। पहले सही कारण समझना जरूरी है। कई बार यह सामान्य ऑयली स्किन नहीं, बल्कि फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। सही डायग्नोसिस और समय पर इलाज से बार-बार होने वाले ब्रेकआउट को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
अगर बार-बार दवाइयां बदलने, फेसवॉश इस्तेमाल करने या कई ट्रीटमेंट करवाने के बाद भी मुंहासे ठीक नहीं हो रहे, तो समस्या सिर्फ सामान्य एक्ने नहीं भी हो सकती। कई मामलों में हार्मोनल बदलाव, फंगल इंफेक्शन या गलत स्किन ट्रीटमेंट के कारण एक्ने लगातार बढ़ते रहते हैं। Amritaya Clinics में अनुभवी डर्मेटोलॉजिस्ट आपकी त्वचा की सही जांच करके कारण पहचानते हैं और उसी के अनुसार ट्रीटमेंट प्लान तैयार करते हैं। ज्यादा देर तक सेल्फ-मेडिकेशन करने के बजाय आज ही अपना अपॉइंटमेंट बुक करें और अपनी त्वचा को सही मेडिकल केयर दें।
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